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Dr. Ambedkar Ki Virasat Aur Drishti | Ambedkar’S Vision For Rights, Justice And Equality-Ashok Choudhary

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Dr. Ambedkar Ki Virasat Aur Drishti | Ambedkar’S Vision For Rights, Justice And Equality-Ashok Choudhary

Dr. Ambedkar Ki Virasat Aur Drishti | Ambedkar’S Vision For Rights, Justice And Equality-Ashok Choudhary

About the Products:

डॉ. भीमराव आंबेडकर भारतीय संविधान के मुख्य शिल्पकार और मानव अधिकारों के पैरोकार थे। भारत को लेकर डॉ. आंबेडकर की दृष्टि समानता, निष्पक्षता और भाईचारे के सिद्धांतों से संचालित थी। वे जाति व्यवस्था के मुखर आलोचक थे, जिसे वे ऐसा सामाजिक उत्पीड़न मानते थे, जिसने भारत में लाखों लोगों को अज्ञानी व गरीब बनाए रखा। उन्होंने तर्क दिया कि लोकतंत्र और मानव अधिकार तथा जाति व्यवस्था की भेदभाव प्रकृति के कारण इसके विरोधी थे। डॉ. आंबेडकर का समाज-सुधार का कार्य दलितों से कहीं अधिक विस्तारित था। उनका मानना था कि महिलाओं को भी पुरुषों के समान अवसर एवं अधिकार मिलने चाहिए। वे महिला अधिकारों के मुखर समर्थक थे। वे सामाजिक न्याय के प्रबल पक्षकर व आजीवन शोषित-वंचितों के उन्नयन और उत्थान के लिए कृत संकल्पित रहे। इस पुस्तक में डॉ. आंबेडकर का व्यक्तिगत और पेशेवर संघर्ष, उनकी न्यायपूर्ण और समान समाज को लेकर दृष्टि तथा भारतीय समुदाय एवं संसार पर उनके स्थायी प्रभाव पर चर्चा शामिल है। पाठकों को इस पुस्तक से डॉ. आंबेडकर, के जीवन और संसार में उनकी सतत प्रासंगिकता का गहन बोध प्राप्त होगा।

Language: Hindi

Page No: 200

Legal Disclaimer: Product images are for illustrative purposes only. Images/packaging/ labels may vary from time to time due to changes made by the manufacturer's manufacturing batch and location.

$7.21

Original: $20.59

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About the Products:

डॉ. भीमराव आंबेडकर भारतीय संविधान के मुख्य शिल्पकार और मानव अधिकारों के पैरोकार थे। भारत को लेकर डॉ. आंबेडकर की दृष्टि समानता, निष्पक्षता और भाईचारे के सिद्धांतों से संचालित थी। वे जाति व्यवस्था के मुखर आलोचक थे, जिसे वे ऐसा सामाजिक उत्पीड़न मानते थे, जिसने भारत में लाखों लोगों को अज्ञानी व गरीब बनाए रखा। उन्होंने तर्क दिया कि लोकतंत्र और मानव अधिकार तथा जाति व्यवस्था की भेदभाव प्रकृति के कारण इसके विरोधी थे। डॉ. आंबेडकर का समाज-सुधार का कार्य दलितों से कहीं अधिक विस्तारित था। उनका मानना था कि महिलाओं को भी पुरुषों के समान अवसर एवं अधिकार मिलने चाहिए। वे महिला अधिकारों के मुखर समर्थक थे। वे सामाजिक न्याय के प्रबल पक्षकर व आजीवन शोषित-वंचितों के उन्नयन और उत्थान के लिए कृत संकल्पित रहे। इस पुस्तक में डॉ. आंबेडकर का व्यक्तिगत और पेशेवर संघर्ष, उनकी न्यायपूर्ण और समान समाज को लेकर दृष्टि तथा भारतीय समुदाय एवं संसार पर उनके स्थायी प्रभाव पर चर्चा शामिल है। पाठकों को इस पुस्तक से डॉ. आंबेडकर, के जीवन और संसार में उनकी सतत प्रासंगिकता का गहन बोध प्राप्त होगा।

Language: Hindi

Page No: 200

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